फूँक दी फुलवारियाँ

डाल कोरोना कसाई , फूस में चिंगारियाँ  ,

चीन के सौदागरों ने , फूँक दी फुलवारियाँ  ।

विश्व सहमा सा अचानक , मौन है आलोचना  ,

मूँदकर आँखें सियासी , सो गई संवेदना   ।

लाकडाउन में फँसी है  ,अर्थ की मादक बहारें   ,
भूख पर पड़ती दया के , बर्फ की ठंडी फुहारें  ।

काँपती अनजान भय से  , ट्रंप की लाचारियाँ   ।

चीन के सौदागरों ने , फूँक दी फुलवारियाँ  ।

फ्रांस भी कुंठित हुआ अब ,कष्ट में जापान है   ,

हाथ में काला कटोरा , द्वार पाकिस्तान है  ।

रूस मुरझाने लगा है  ,और यूके रो रहा  ,

बेच नकली किट्स ड्रैगन , डालरों पर सो रहा  ।

ढाँक ली है नाक अपनी  ,पाक की दुश्वारियाँ   ।

चीन के सौदागरों ने  ,फूँक दी फुलवारियाँ   ।

व्यस्त हैं इतने सितारे ,  रात भी सोती नहीं  ,

चाँदनी से चाँद की भी , बात अब होती नहीं  ।

मारकर पत्थर जमाती  ,पा रहे बिरियानियाँ  ,

हाथ जोड़े ढूंँढती , सरकार की नादानियांँ  ।

मरकजों ने थाम ली है , हाथ अपने आरियाँ   ।
चीन के सौदागरों ने फूंक दी फुलवारियाँ  ।

रौंद डाले वे भले ही  ,डालियों को पाँव से   ,

मुस्कुराई कोपलें गहरी , जड़ों के गाँव से   ।

गा बसंती राग भँवरे ,  वेदना के साज पर  ,

खिल उठेगी यह कली , फिर गुनगुनी आवाज पर   ।

नौ महीने बाद  गूँजेंगी , नई किलकारियाँ    ।

चीन के सौदागरों ने , फूँक दी फुलवारियाँ।।

 

मोहन द्विवेदी

9350717901

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